भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में जेएनपीए ने 8.17 मिलियन टीईयू (20 फुट के मानक कंटेनर के बराबर इकाई) कंटेनर कार्गो का संचालन किया। यह देश के प्रमुख बंदरगाहों द्वारा संभाले गए कुल कंटेनर यातायात का 53.93 प्रतिशत था। इसी अवधि में बंदरगाह ने 102.01 मिलियन टन कुल कार्गो संभाला।
छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के महाराष्ट्र दौरे के दौरान जेएनपीए की महाप्रबंधक मनीषा जाधव ने बंदरगाह की कार्यप्रणाली, व्यापार सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बंदरगाह का ध्यान केवल कार्गो संचालन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आयातकों और निर्यातकों के लिए माल की आवाजाही को तेज और सुगम बनाने पर भी है।
खास बातें
- पिछले 37 वर्षों में यहां कंटेनर के साथ-साथ लिक्विड और अन्य प्रकार के कार्गो के लिए सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
- जेएनपीए के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में 72.66 प्रतिशत कंटेनरों को डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी के माध्यम से क्लीयर किया गया था।
- वित्त वर्ष 2023-24 में डायरेक्ट पोर्ट एंट्री का हिस्सा 48.73 प्रतिशत था।
37 वर्षों में विकसित हुआ आधुनिक बंदरगाह
जेएनपीए का संचालन 26 मई 1989 को शुरू हुआ था। पिछले 37 वर्षों में यहां कंटेनर के साथ-साथ लिक्विड और अन्य प्रकार के कार्गो के लिए सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में बंदरगाह में पांच कंटेनर टर्मिनल तथा लिक्विड और जनरल कार्गो के लिए अलग टर्मिनल सुविधाएं हैं।
जेएनपीए के अनुसार, बंदरगाह की मौजूदा कंटेनर क्षमता लगभग 10.4 मिलियन टीईयू प्रतिवर्ष है। बढ़ते समुद्री व्यापार को देखते हुए उपलब्ध क्षमता के बेहतर उपयोग और परिचालन दक्षता में सुधार पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
आयातकों और निर्यातकों के लिए आसान प्रक्रियाएं
आयातकों के लिए जेएनपीए में डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी (डीपीडी) की सुविधा उपलब्ध है। निर्धारित सीमा शुल्क प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आयात कंटेनरों को सीधे बंदरगाह से फैक्ट्री या अन्य निर्धारित स्थान तक ले जाया जा सकता है। इससे कंटेनर की अतिरिक्त हैंडलिंग और बीच में दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता कम होती है।
जेएनपीए के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में 72.66 प्रतिशत कंटेनरों को डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी के माध्यम से क्लीयर किया गया था।
निर्यातकों के लिए डायरेक्ट पोर्ट एंट्री (डीपीई) की सुविधा उपलब्ध है। इसके तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फैक्ट्री में तैयार निर्यात कंटेनरों को सीधे बंदरगाह तक लाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2023-24 में डायरेक्ट पोर्ट एंट्री का हिस्सा 48.73 प्रतिशत था।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य माल की अनावश्यक आवाजाही और हैंडलिंग को कम करना तथा आयात-निर्यात प्रक्रिया में समय बचाना है।
मध्य भारत के उद्योगों से जुड़ा प्रमुख समुद्री मार्ग
जेएनपीए रेल और सड़क नेटवर्क के माध्यम से देश के आंतरिक क्षेत्रों से जुड़ा है। इसका लाभ महाराष्ट्र के साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और अन्य राज्यों के उद्योगों को भी मिल सकता है।
छत्तीसगढ़ के इस्पात, खनिज, कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग क्षेत्र के उत्पादों को रेल या सड़क के माध्यम से जेएनपीए तक लाकर समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है। इसी प्रकार आयातित मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल को बंदरगाह से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया जा सकता है।
जेएनपीए के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आईसीडी से संबंधित रेल परिवहन के माध्यम से लगभग 1.15 मिलियन टीईयू कंटेनर कार्गो का संचालन हुआ।
परिचालन दक्षता में सुधार
बंदरगाह के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 1.71 दिन रहा। यह वह औसत समय है जिसमें जहाज के बंदरगाह पर आने, कार्गो संचालन पूरा होने और उसके रवाना होने की प्रक्रिया पूरी होती है।
भारत सरकार के अगस्त 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार, विश्व बैंक और एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2025 में जेएनपीए को 22वें स्थान पर रखा गया है।
बंदरगाह प्रशासन का कहना है कि परिचालन समय कम होने से कार्गो की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है और लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया में समय की बचत होती है।
277 हेक्टेयर में विशेष आर्थिक क्षेत्र
जेएनपीए ने 277 हेक्टेयर भूमि पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) विकसित किया है। इसका उद्देश्य विनिर्माण और निर्यात आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
एसईजेड में कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, खाद्य उत्पाद और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के लिए इकाइयां विकसित की जा रही हैं। बंदरगाह के निकट उत्पादन और निर्यात सुविधाएं होने से तैयार माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजने में सुविधा मिल सकती है।
ट्रक चालकों के लिए बुनियादी सुविधाएं
बंदरगाह की लॉजिस्टिक्स श्रृंखला में ट्रांसपोर्टर और ट्रक चालक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जेएनपीए ने करीब 45 हेक्टेयर क्षेत्र में केंद्रीकृत पार्किंग प्लाजा विकसित किया है, जिसमें लगभग 3,000 ट्रकों को रखने की क्षमता बताई गई है।
प्लाजा में ट्रक चालकों के लिए ठहरने की सुविधा, शौचालय, स्नानघर और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर और सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहित करने वाली पहल भी की जा रही हैं।
हरित ऊर्जा और डिजिटल तकनीक पर जोर
जेएनपीए में पर्यावरण-अनुकूल संचालन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। बंदरगाह परिसर में कंटेनर परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है तथा इनकी संख्या बढ़ाने की योजना है।
जहाजों को बंदरगाह पर खड़े रहने के दौरान बिजली उपलब्ध कराने के लिए शोर पावर व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बताई गई है। इसका उद्देश्य जहाजों के सहायक इंजनों के उपयोग को कम करना और उत्सर्जन में कमी लाना है।
इसके अलावा, गेट ऑटोमेशन, कंटेनर ट्रैकिंग और अन्य डिजिटल प्रणालियों का उपयोग बंदरगाह संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए किया जा रहा है।
वाढवण बंदरगाह से भविष्य में बढ़ेगी क्षमता
महाराष्ट्र में विकसित किया जा रहा वाढवण बंदरगाह भविष्य में देश की समुद्री कार्गो क्षमता बढ़ाने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। जेएनपीए अधिकारियों के अनुसार, वाढवण बंदरगाह जेएनपीए से लगभग 150 किलोमीटर दूर है और इसकी प्रस्तावित क्षमता जेएनपीए की वर्तमान क्षमता से लगभग ढाई गुना होगी।
वाढवण के विकास से भविष्य में बढ़ते समुद्री व्यापार की जरूरतों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने की संभावना है।
व्यापार सुगमता बनी प्राथमिकता
जेएनपीए की मौजूदा पहलों में कार्गो संचालन, कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक, प्रत्यक्ष डिलीवरी और हरित उपायों को एकीकृत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका सीधा संबंध आयातकों और निर्यातकों के लिए माल की आवाजाही के समय और प्रक्रिया को बेहतर बनाने से है।
आयातित माल को तेजी से फैक्ट्री तक पहुंचाना और निर्यातित माल को समय पर बंदरगाह तक लाना उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को प्रभावित करता है। इस दृष्टि से जेएनपीए की सुविधाएं महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य भारत के राज्यों के उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण समुद्री संपर्क उपलब्ध कराती हैं।


