केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में कृषि अनुसंधान, जैविक तनाव प्रबंधन और किसानोन्मुख तकनीकों के विकास में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर के योगदान की सराहना की। उन्होंने उभरती कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास को आवश्यक बताते हुए संस्थान की गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।

केंद्रीय कृषि मंत्री के रायपुर आगमन पर स्वामी विवेकानंद विमानतल में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वरिष्ठ अधिकारियों तथा गणमान्य नागरिकों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात कर संस्थान द्वारा संचालित अनुसंधान कार्यक्रमों, तकनीकी हस्तक्षेपों और प्रमुख पहलों की जानकारी दी।

डॉ. राय ने फसलों में कीट एवं रोगों सहित विभिन्न जैविक तनावों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान और तकनीकी प्रयासों से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने फसल उत्पादकता बढ़ाने, कृषि क्षेत्र की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विकसित की जा रही सतत और किसानोन्मुख तकनीकों की भी जानकारी दी। उन्होंने राज्य के कृषि विभाग के साथ समन्वय से कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी हस्तांतरण को प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्थापित आईसीएआर-एनआईबीएसएम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रमुख संस्थानों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने संस्थान के अनुसंधान कार्यों, नवाचारों और किसान-केंद्रित पहलों की सराहना करते हुए निकट भविष्य में संस्थान का दौरा कर इसकी अनुसंधान गतिविधियों और तकनीकी पहलों का अवलोकन करने की इच्छा व्यक्त की।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में फसलों को विभिन्न जैविक तनावों से बचाने, उत्पादकता बनाए रखने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नई तकनीकों का विकास आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में आईसीएआर-एनआईबीएसएम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

यह मुलाकात केंद्र और राज्य सरकारों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच कृषि अनुसंधान, फसल तनावों के प्रभावी प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए समन्वित प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।