मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद छिंदवाड़ा द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू की रविवार की कक्षा के उपरांत एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाविद्यालय छिंदवाड़ा में हर्षोल्लास से मनाई गई। सर्वप्रथम समस्त अतिथियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उनका पुण्य स्मरण किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन, परामर्शदाता एवं पर्यावरणविद श्री विनोद कुमार तिवारी, परामर्शदाता श्रीमती लता नागले, श्री श्यामल राव, श्रीमती तृप्ति सिंह एवं श्री आशीष साहू सहित बड़ी संख्या में बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थी उपस्थित थे।

खास बातें

  • उनका एकात्म मानववाद आज के बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
  • श्री श्यामल राव ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी केवल 52 वर्ष जिए, पर इतने कम समय में एक संपूर्ण जीवन दर्शन दे दिया।
  • विद्यार्थी डिग्री के लिए नहीं, दृष्टि के लिए पढ़ें।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन ने कहा कि आज हम एक ऐसे महापुरुष की जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना। उनका एकात्म मानववाद आज के बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। हमारा यह कार्यक्रम भी अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित है। आप सभी छात्र मध्यप्रदेश में सामाजिक बदलाव के असली वाहक हैं।

वरिष्ठ समाजसेवी एवं पर्यावरणविद श्री विनोद तिवारी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी राजनेता के साथ-साथ एक सच्चे ईमानदार लेखक, निष्पक्ष पत्रकार एवं प्रकृति के चिंतक थे। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका मानववाद कहता है कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति अलग-अलग नहीं हैं।

परामर्शदाता श्रीमती लता नागले ने कहा कि पंडित जी ने कहा था— “ राष्ट्र एक माँ है। ” उन्होंने महिला को राष्ट्र की शक्ति माना। एकात्म मानववाद में नारी और पुरुष समाज रूपी गाड़ी के दो पहिये हैं। श्री श्यामल राव ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी केवल 52 वर्ष जिए, पर इतने कम समय में एक संपूर्ण जीवन दर्शन दे दिया। आर्थिक विकास जरूरी है, पर सांस्कृतिक मूल्यों के बिना विकास विनाश है। श्रीमती तृप्ति सिंह ने कहा कि पंडित जी का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था। विद्यार्थी डिग्री के लिए नहीं, दृष्टि के लिए पढ़ें। समुदाय में जाकर अपनत्व बनाएं।

कार्यक्रम में बीएसडब्ल्यू, एमएसडब्ल्यू के विद्यार्थियों ने भी पंडित जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर पूर्व छात्रा कामिनी कहार ने देशभक्ति गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने संकल्प लिया कि हम जो भी प्रोजेक्ट, फील्ड वर्क करेंगे, उसमें अंत्योदय और एकात्म मानववाद की झलक होगी तथा शासकीय योजनाओं को कागज से निकालकर आखिरी व्यक्ति तक ले जाएंगे। आभार प्रदर्शन परामर्शदाता श्री आशीष साहू ने किया।