ग्रामीण क्षेत्र में पले-बढ़े युवा के लिए पशुपालन अब केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं रहा। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले तो यही पशुपालन एक सफल उद्यम का रूप ले सकता है। नरसिंहपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत खमरिया निवासी श्री शुभम दुबे ने इसी सोच के साथ अपने परिवार के पारंपरिक डेयरी व्यवसाय को नई दिशा दी। आज उनकी बेटी शार्वी के नाम से संचालित ‘शार्वी फार्म हाऊस’ आधुनिक डेयरी की ओर बढ़ता हुआ एक उदाहरण बन रहा है।
श्री शुभम दुबे ने डेयरी की शुरुआत छोटे स्तर से की थी। परिवार के पास पहले सब्जी उत्पादन और डेयरी का व्यवसाय था, लेकिन सीमित संख्या में पशु होने के कारण व्यवसाय का दायरा भी सीमित था। दिल्ली से पढ़ाई पूरी करने के बाद शुभम ने पशुपालन को व्यवस्थित और आधुनिक व्यवसाय के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसी दौरान वर्ष 2025-26 में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का लाभ मिला और उनकी डेयरी के विस्तार को नई गति मिली।
खास बातें
- डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत श्री शुभम दुबे की डेयरी परियोजना के लिए 42 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई।
- इसमें उन्होंने लगभग 4 से 5 लाख रुपये की स्वयं की अंशदान राशि लगाई।
- श्री दुबे के अनुसार, डेयरी से उन्हें लगभग 40 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त हो रही है।
42 लाख रुपये की परियोजना से बढ़ा कारोबार
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत श्री शुभम दुबे की डेयरी परियोजना के लिए 42 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। इसमें उन्होंने लगभग 4 से 5 लाख रुपये की स्वयं की अंशदान राशि लगाई। योजना के अंतर्गत पशु क्रय एवं बीमा की सुविधा भी शामिल है। वर्तमान में शार्वी फार्म हाऊस में मुर्रा नस्ल की 14 भैंस और एचएफ नस्ल की 11 गाय सहित कुल 25 पशु हैं। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्हें अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने, दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी को व्यवसायिक रूप से विस्तार देने का अवसर मिला।
शार्वी फार्म हाऊस में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 130 से 140 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध की आपूर्ति निजी डेयरी को की जाती है, जहां लगभग 50 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर प्राप्त होती है। श्री दुबे के अनुसार, डेयरी से उन्हें लगभग 40 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त हो रही है। पशुओं की संख्या और दूध उत्पादन बढ़ने के साथ डेयरी परिवार की आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।
पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
श्री दुबे का मानना है कि अच्छी नस्ल के पशुओं के साथ बेहतर पोषण और नियमित देखभाल भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए वे पशुओं के आहार, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हैं। पशु आहार सहित अन्य व्यवस्थाओं पर प्रतिमाह लगभग 80 हजार से एक लाख रुपये तक खर्च होता है। पशुओं के लिए आवश्यक चारे का निर्माण भी वे स्वयं करते हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण और संतुलित आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
शार्वी फार्म हाऊस में पारंपरिक पशुपालन के साथ आधुनिक तकनीक का भी समावेश किया गया है। भैंसों का दूध हाथ से निकाला जाता है, जबकि गायों का दूध मशीन के माध्यम से निकाला जाता है। पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण, दूध उत्पादन और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शुभम का प्रयास है कि डेयरी के प्रत्येक कार्य को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाए, ताकि उत्पादन की गुणवत्ता और पशुओं की सेहत दोनों बेहतर बनी रहें।
डेयरी से निकलने वाले गोबर का उपयोग भी उपयोगी तरीके से किया जा रहा है। शुभम दुबे गोबर से जैविक खाद तैयार करते हैं। इससे डेयरी के अपशिष्ट का बेहतर उपयोग होने के साथ जैविक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास हो रहा है। उनके प्रयासों को पहचान भी मिली है और उन्हें सर्वोत्तम किसान के रूप में 25 हजार रुपये का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
दूध उत्पादन से आगे, वैज्ञानिक ब्रीडिंग का लक्ष्य
शुभम दुबे का अगला लक्ष्य डेयरी को केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रखते हुए वैज्ञानिक ब्रीडिंग की दिशा में आगे बढ़ाना है। अच्छी नस्ल के पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने और एक व्यवस्थित ब्रीडिंग फार्म विकसित करने की उनकी योजना है। भविष्य में वे डेयरी का विस्तार कर नई इकाई स्थापित करना, अधिक लोगों को रोजगार देना और पशुपालकों के लिए आधुनिक तकनीकों का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते हैं।
शुभम दुबे अपनी सफलता में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों और पशुपालन विभाग के सहयोग को महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि योजना के सहयोग से आज उनकी छोटी शुरुआत एक व्यवस्थित डेयरी व्यवसाय का रूप ले रही है।


