“सही पोषण – देश रोशन” के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज इंदौर के लता मंगेशकर सभागृह में हुआ। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन और एम्स भोपाल के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मध्यप्रदेश में समुदाय आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन (बच्चों में गंभीर कुपोषण की पहचान और इलाज की व्यवस्था) कार्यक्रम को वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती निर्मला भूरिया (मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन) ने पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पोषण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय और विभिन्न विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों के उपयोग और गर्भवती व धात्री माताओं के पोषण पर विशेष जोर दिया। श्रीमती कविता पाटीदार (सांसद, राज्यसभा) ने भी पोषण को समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बताते हुए जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में भारत सरकार द्वारा वाराणसी से प्रसारित राष्ट्रीय वेबकास्ट भी दिखाया गया, जिसे श्री योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश), श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (केंद्रीय मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) और श्रीमती सावित्री ठाकुर (केंद्रीय राज्य मंत्री) ने संबोधित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कुपोषित बच्चों की पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें समय पर उचित देखभाल उपलब्ध कराना, परिवारों को पोषण संबंधी व्यवहार के लिए सक्षम बनाना और उपचार व फॉलो-अप की निरंतरता सुनिश्चित करना भी है। इस साझेदारी को आगे बढ़ाने और विभाग के साथ समझौता-ज्ञापन को सुगम बनाने में डॉ. अरुण एम. कोकणे (विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर, सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स भोपाल) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में विभाग पोषण एवं कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रमों में तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण, डेटा आधारित निगरानी और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान “जीवन के पहले 1000 दिन” सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही तथा “हमारी आंगनवाड़ी – हमारी जिम्मेदारी” विषयों पर प्रदर्शनी और सूचना-पट भी लगाए गए। एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच यह समझौता प्रदेश में पोषण कार्यक्रमों के लिए चिकित्सा संस्थान की विशेषज्ञता और सरकारी तंत्र की मैदानी पहुंच को एक साथ जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। एम्स भोपाल का उद्देश्य केवल तकनीकी सलाह देना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक ज्ञान को जमीनी कार्यक्रमों से जोड़कर ऐसे मॉडल विकसित करना है जिन्हें प्रभावी, टिकाऊ और व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके।