उज्जैन 24। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड महिदपुर के ग्राम कोयल की श्रीमती अमिता दीदी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन गई हैं।
वर्ष 2023 में स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का कार्य निरंतर कर रही हैं।
खास बातें
- समूह से जुड़ने से पूर्व की स्थिति ग्राम कोयल निवासी श्रीमती अमिता, पति श्री दीपेश, 12वीं उत्तीर्ण हैं।
- योजना को समझकर अमिता दीदी ने अपने मोहल्ले की 12 महिलाओं के साथ 11 मई 2023 को “उज्ज्वल स्व-सहायता समूह” का गठन किया तथा समूह आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- समूह से जुड़ने के पश्चात उनकी व्यक्तिगत मासिक आय बढ़कर 10 हजार रुपये तथा परिवार की मासिक आय 15 हजार रुपये हो गई है।
समूह से जुड़ने से पूर्व की स्थिति ग्राम कोयल निवासी श्रीमती अमिता, पति श्री दीपेश, 12वीं उत्तीर्ण हैं।
समूह से जुड़ने से पूर्व परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय मात्र दो हजार रुपये तथा परिवार की मासिक आय लगभग आठ हजार रुपये थी, जिससे परिवार को अच्छा जीवन स्तर उपलब्ध कराना तथा बच्चों की बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना कठिन था।
अमिता दीदी सदैव यह सोचती थीं कि परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए वे किस प्रकार योगदान दे सकती हैं।
स्व-सहायता समूह सेजुड़ाव वर्ष2023 में आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्राम में स्व-सहायता समूह गठन हेतु टीम पहुँची। योजना को समझकर अमिता दीदी ने अपने मोहल्ले की 12 महिलाओं के साथ 11 मई 2023 को “उज्ज्वल स्व-सहायता समूह” का गठन किया तथा समूह आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे समूह की सचिव हैं। समूह कोयल आजीविका ग्राम संगठन तथा आदर्शसंकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) से संबद्ध है। क्षमता वर्धन एवं कैडर भूमिका समूह के माध्यम से श्रीमती अमिता दीदी ने बुककीपर, लखपति दीदी तथा बैंक सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे बैंक सखी एवं आजीविका सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप में कार्यरत हैं।
सीआरपी के रूप में उन्होंने वीपीआरपी सर्वे तथा बैंक संबंधी कार्य किए, जिससे उनमें यह आत्मविश्वास आया कि वे भी कुछ कर सकती हैं। परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें निरंतर सहयोग दिया।
आर्थिक सशक्तिकरण: दुग्ध डेरी की स्थापना
अमिता दीदी ने समूह से रिवॉल्विंग फंड दो हजार रुपये तथा सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) 20 हजार रुपये के साथ कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) 25 हजार रुपयेका ऋण प्राप्त कर ग्राम में दुग्ध डेरी स्थापित की। बैंक द्वारा भी ऋण उपलब्ध कराया गया। परिवार के सदस्यों ने डेरी संचालन में सहयोग दिया।
आजीविका गतिविधियों के रूप में वे दूध डेरी एवं सीआरपी कार्य कर रही हैं। समूह से जुड़ने के पश्चात उनकी व्यक्तिगत मासिक आय बढ़कर 10 हजार रुपये तथा परिवार की मासिक आय 15 हजार रुपये हो गई है।
लाड़ली बहना योजना तथा एक बगियाँ माँ के नाम योजना का भी उन्होंने लाभ लिया है। सामाजिक योगदान एवं सम्मान अमिता दीदी अपने क्षेत्र की महिलाओं को आजीविका मिशन योजना से प्रशिक्षण दिलाकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का कार्य निरंतर कर रही हैं।
जिला पंचायत के सहयोग तथा एनजीओ की मदद से महिलाओं के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करवाने में वे सीआरपी के रूप में सहयोग दे रही हैं।




